Sunday, 27 June 2010

लालू के कारनामे : भाग 4

आज लालू जब स्कूल से वापस आये तो अपनी ही उधेड़बुन में थे...हाथ में एक साफ्टी पकड़े खाते हुये घर में घुसे जो टपाटप जमीन पर हाथ से पिघल कर गिर रही थी. दोपहर की गर्मी आज बर्दाश्त के बाहर थी, बाहर आँगन में जमीन बिलकुल तवे की तरह गर्म होकर तप रही थी और कुछ बंदर वहाँ उछल कूद कर रहे थे..लालू ने अपना बैग चारपाई पर पटका और अपनी मम्मी को आवाज़ लगायी जो कहीं नहीं दिख रही थी..वैसे तो उनकी मम्मी कुछ न कुछ करती ही रहती थी घर में..लेकिन आज खाना बनाकर कुछ देर पहले कमरे में जाकर आराम करने लगीं थीं..लालू की निगाह बाहर गयी और वहाँ उन्हें कुछ बंदर दिख गये. तो जल्दी से बंदरों को भगाने वाला एक लम्बा डंडा उठाया और बाहर गये जहाँ पर सूखते हुये कपड़ों को एक बंदरिया खींचने की कोशिश कर रही थी..बंदरिया लालू को देख नहीं पायी तो लालू ने चुपके से उस पर कस कर डंडा जमा दिया..बंदरिया लालू पर जोर से कुछ खौखियाई और फिर कपड़े जमीन पर छोड़ कर पड़ोसी की छत पर कूद कर भाग गयी. उसके पड़ोसी के छत पर कूदते ही किसी बिल्ली की जोर से म्याऊँ-म्याऊँ की दर्दनाक चीखें आईं..लालू ने झाँका तो वह बंदरिया वहाँ घूमती एक बिल्ली से उलझी हुई थी..लालू ने उन दोनों पर कुछ गिट्टियाँ फेंकीं और संतुष्ट होकर अन्दर वापस आ गये. घर में कहारिन जिसका नाम अनीता था बर्तन मांज रही थी उसने लालू को डांटा कि ऐसा करने से बंदरिया उन्हें काट भी सकती थी..तो लालू पलटे और अनीता पर चिल्लाने लगे.

लालू : '' मम्मी कहाँ है और ये रिया दीदी भी नहीं दिख रही है ? और तू अपना मुँह बंद रखा कर अनीता..मुझे पता है कि बंदरों को कैसे भगाया जाता है.''

अनीता: '' तुम्हारी मम्मी अन्दर है आराम कर रही है और रिया अपनी सहेली से मिलने उसके घर गयी है.''
( और मुँह में बुदबुदायी कि तुमसे बढ़ कर शैतान बन्दर और कहाँ हो सकता है. )

और फिर लालू जबाब पाकर बरामदे में पड़ी एक चारपाई पर जाकर लेट कर आराम फरमाने लगे. सीलिंग फैन भी आन कर लिया. अब उन्हें जोरों से प्यास लगने लगी.

लालू: '' अनीता तू उठकर मुझे एक गिलास पानी लाकर दे.''

अनीता: '' अरे लालू भैया इतने भी न आलसी बनो कि तुम एक गिलास पानी भी लेकर न पी पाओ..जाओ फ्रिज में से ठन्डे पानी की बोतलें हैं..जाकर खुद लेकर पी लो.''

लालू ने उसे आँखें दिखायीं कुछ मुँह में बड़बड़ाये और अनमने से उठकर किचन में जाकर पानी का गिलास भर लाये.
कुछ देर बाद अनीता ने काम ख़त्म कर लिया और अपने घर जाने लगी.

अनीता: '' लालू भैया जरा उठो और दरवाज़ा बंद कर लो अन्दर से..मैं अब जा रही हूँ.''

लालू उठकर दरवाज़ा बंद करने गये उसी समय बाहर एक भिखारी जा रहा था. दरवाज़ा खुला देखा और लालू को भी तो कुछ उम्मीद के साथ आगे आया और पैसे मांगने लगा...लालू ने उसे डांट कर भगाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं टला और अड़ा रहा वहाँ तो लालू को गुस्सा आ गया.

भिखारी : '' बेटा अपनी माँ को बुला दो..कुछ पैसे दे दो भगवान के नाम पर वो तुम्हारा भला करेगा.''

लालू: '' चल जा अपनी रास्ता नाप..सारा दिन मुफ्त में कमाई करता फिरता फिर भी कोई घर नहीं छोड़ता.. जा आगे बढ़.''

भिखारी: '' बेटा आपकी खूब लम्बी उम्र हो आप बड़े होकर बहुत बड़े इंसान बनो..भगवान तुम्हें खूब बरक्कत देगा.''

लालू: '' अच्छा ठहरो जरा यहीं मैं अभी आता हूँ. ऐसे तो तुम जाओगे नहीं.''

और अन्दर कमरे में जाकर कुछ लाने गये तो इतनी देर में रिया भी आ गयी.

रिया: '' ठहरो बाबा मैं तुम्हारे लिये अभी कुछ लायी.''

रिया भी अंदर गयी और इधर लालू वापस एक कपड़े में कुछ छुपा कर हाथ में लेकर आये. भिखारी का चेहरा उम्मीद से चमक उठा.

लालू: '' तुम अब यहाँ से चुपचाप खिसकोगे कि नहीं या फिर कोई और इंतजाम किया जाये ?''

भिखारी: ' आप जो कुछ भी लाये हो वो लेकर मैं चुपचाप चला जाऊँगा.''

लालू: '' उसके बाद तो कभी यहाँ वापस नहीं आओगे.''

भिखारी: '' जैसा आप कहें हुजूर.''

लालू: '' तो पलट कर दूसरी तरफ देखो.''

भिखारी खड़ा होकर पलटा और लालू ने कपड़े में छुपाया खिलौने वाला तमंचा उसकी पीठ पर सटा दिया.

लालू: '' अब जायेगा की नहीं यहाँ से या इसे चलाऊँ.''

भिखारी: '' अरे हुजूर, इसे ना चलाना मैं चला जाता हूँ..अब कभी नहीं आऊँगा... जाता हूँ.''

भिखारी उस तमंचे को असली वाला समझ कर घबरा गया और सर पर पैर रख कर भागा वहाँ से...

उसके जाने के बाद लालू दरवाज़ा बंद करके अंदर आ गये. इतने में रिया कुछ पैसे लेकर आई.

रिया: '' लालू वह भिखारी इतनी जल्दी कहाँ चला गया ? ''

लालू: '' हा हा..मैंने उसे भगा दिया दीदी.''

रिया: '' कुछ पैसे दे दिये ना उसे ? ''

लालू: '' अगर मैं उसे पैसे देता तो फिर वह अक्सर यहाँ आता तो मैंने उसे नकली तमंचा इस्तेमाल करके भगा दिया..हा हा हा हा ''

रिया: '' तूने ये अच्छा नहीं किया अगर मम्मी को पता लगेगा तो वह बोलेंगी कि किसी की बद्दुआ लेने से तो अच्छा है कुछ दे दिया जाये.''

लालू: '' अरे दीदी, अब वह इधर का रास्ता भूल जायेगा..घर-घर जाकर ठगते हैं ये लोग. कोई काम नहीं करते तुम्हें क्या पता कि कितना पैसा इकट्ठा कर लिया हो इसने..हा हा हा हा...तुम चिंता न करो.''

और फिर लालू अपनी मम्मी को आवाज़ लगाते हुये अंदर भाग गये...

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