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Monday, 4 April 2011

मदर्स डे क्यों मनाते हैं ?

जैसे ही मदर्स डे आता है हर साल..उसके बारे में सवाल भी चारों तरफ से सबकी आँखों में दिखने लगते हैं. भारत के लोगों में बहुत कौतूहल रहता है और अपनी जिज्ञासा जाहिर करने लगते हैं. और ये सवाल हर बार, हर साल ही उठता है कि मातृ-दिवस यहाँ इंग्लैंड व अन्य पश्चिमी देशों में क्यों मनाया जाता है...क्योंकि सबका तर्क होता है कि माँ का प्यार तो हमेशा हर दिन अपने बच्चे के लिये एक सा ही रहता है तो फिर साल में एक दिन को ही क्यों उस प्यार की खातिर रखा गया है ? हाँ, बिलकुल सही है ये सवाल क्योंकि एक माँ का प्रेम पवित्र गंगा की अनवरत धारा के समान हमेशा बहता रहता है...तो भई, फिर साल का एक खास दिन ही क्यों इसके लिये सुनिश्चित किया गया है उसकी अहमियत जताने के लिये ? हालाँकि, अब भारत में भी पश्चिमी सभ्यता की नकल करके बहुत लोग इस दिवस को मनाने लगे हैं..लेकिन शायद बहुत से लोग इससे अनभिज्ञ हैं. जो मनाते हैं वहाँ पर वो शायद इसे एक फैशन की तरह ले रहे हैं..वैलेनटाइन दिवस, शादी की सालगिरह, और जन्मदिवस मनाने की तरह..क्योंकि अब इन्हें भी वहाँ के लोग मनाने लगे हैं.

हर रिश्ते का महत्व हर दिन होना चाहिये..तो फिर साल के एक खास दिन ही क्यों उसको धूम-धाम से मनाते हैं ?

तो सब लोगों के सवालों के जबाब में मैं कुछ अधिक नहीं बस अपने सीधे-साधे लहजे में ही कुछ कहना चाहूँगी कि हर दिन, हर जगह ये मदर्स डे एक सा ही रहता है. और एक माँ का प्यार हर दिन निस्वार्थ ही होता है. हर माँ अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने की कोशिश करती है. उन संस्कारों को और माँ के निस्वार्थ प्यार और त्याग को कुछ बच्चे याद रखते हैं और कुछ नहीं. लेकिन माँ के इस निस्वार्थ प्यार व त्याग को याद रखने को, एक खास तरह का आदर देने को उसके सम्मान में पश्चिमी देशों में एक पर्व यानि त्योहार जैसा बना दिया गया है.

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत में भी तमाम पर्व होते हैं. तो उदाहरण के तौर पर आप सभी अपने आप से पूछिये कि रक्षा बंधन का क्या महत्व है..क्यों मनाते हैं हम इसे ? इसलिये...क्योंकि ये है भाई-बहन के प्यार का प्रतीक, है ना..? बहन का प्यार भी तो निस्वार्थ होता है. तो बस यही बात है मदर्स डे की भी. ये माँ और बच्चे के आपस के प्रेम और त्याग का प्रतीक है. और इसीलिए मदर्स डे को एक विशेष त्योहार बना दिया गया है. बहनें भी कहाँ भाइयों से माँगती हैं रक्षा-बंधन पर..फिर भी भाई लोग उपहार देते हैं. क्यों मनाते हैं वो लोग राखी दिवस को ? क्या बहनें कहती हैं ? नहीं...इसलिये,क्योंकि परम्परा डाल दी गयी है इस दिवस की. उसी तरह से यहाँ मदर्स डे भी मनाया जाने लगा. लोगों ने माँ को आदर देने के लिये भी एक परम्परा चालू कर दी. कोई माँ नहीं कहती ना ही कहेगी शायद इस त्योहार को मनाने के लिये. बच्चे ही इसे परम्परा बना कर निभाने लगे हैं यहाँ.

हम माँ लोग कहाँ बच्चों से पूछते हैं कुछ हमें देने को या हमारे लिये कुछ करने को..अब देखो, मेरे बेटे ने कल मुझे कुछ पैसे दिये और डिनर वगैरा के लिये भी मुझे बेटा और बेटी ले गये. मैंने कहा कि मेरा प्यार तुम्हारे पैसे के लिये नहीं है. मुझे तुम्हारे प्यार व अच्छे वर्ताव की जरूरत है. पैसा जब लूँगी जब कोई मजबूरी होगी. फिर भी न लेने पर वह नाराज़ हो गया तो मुझे मन ना होते हुये भी लेना पड़ा..बस उसे खुश करने के लिये :)