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Sunday, 5 June 2011

डायबिटीज और मरीज

डायबिटीज एक बहुत ही गंभीर बीमारी है जिसे एक बार हो जाने से इंसान को जिंदगी भर भुगतना पड़ता है. जब किसी को जांच करवाने पर पहली बार पता लगता है तो उस इंसान के व उसके परिवार के कदमों के नीचे से जैसे जमीन निकल जाती है. अब एक रिसर्च के मुताबिक सबके दिलों को हिला देने वाली खबर है कि हर तीन मिनट में एक इंसान डायबिटीज का शिकार होते हुये पाया जा रहा है. यहाँ इंग्लैंड में 3% लोग डायबेटिक हैं...और उनका नंबर बराबर बढ़ता ही जा रहा है. जिनमे अब युवा लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. और 2025 तक पूरे विश्व में डायबेटिक लोगों की संख्या दुगनी होने की सम्भावना की जा रही है.


डायबिटीज क्या है ?


डायबिटीज के लक्षण होते हैं हाई ब्लड सुगर लेवल या फिर लो ब्लड सुगर लेवल. और अगर डायबेटिक लोग लापरवाही बरतते हैं यानि अपने खान-पान में संतुलन नहीं रखते हैं तो इस असंतुलित ब्लड सुगर लेवल से उन्हें आँखों, किडनी, दिल, टांगों, पैरों और रक्तसंचार में बहुत समस्यायें पैदा हो सकती है.


शरीर का अग्न्याशय (Pancreas) अंतःस्राव (Harmone) को जिसे हम इंसुलिन कहते हैं उसे पैदा करता है. और इस इंसुलिन की सहायता से ग्लूकोस हमारे रक्तप्रवाह में पहुँचता है जिससे शरीर को ऊर्जा ( Energy) मिलती है. इंसुलिन की कमी व इसके ना होने से ग्लूकोस रक्तचाप में न पहुँचकर शरीर में इकठ्ठा हो जाता है और यूरिन में निकल जाता है. डायबिटीज का संबंध मोटापा व जननिक (Genetic) से भी है. या जो लोग मीठी चीज़ें अत्यधिक खाते हैं या शराब आदि बहुत पीते हैं उन्हें भी डायबिटीज हो जाने की अधिक सम्भावना रहती है. डाक्टर से इस बीमारी की पुष्टि होने के पहले इस बीमारी के आसार ये होते हैं:


1.प्यास का बहुत लगना.


2.अत्यधिक थकान.


3.दृष्टि में धुंधलापन.


4.बार-बार पेशाब जाना.


5.एकदम से तमाम वजन कम हो जाना.


6.घाव व जख्मों का जल्दी न भरना आदि.


जैसा कि अब अधिकाँश लोग जानते हैं डायबिटीज दो तरह की होती है:


A. टाइप 1 डायबिटीज: ये या तो जननिक (Genetic) होती है या अग्नाशय में शरीर के इम्यून सिस्टम या कहिये विषाणु (some Virus) से इंसुलिन पैदा करने वाले कोष की क्षति से इंसुलिन बिलकुल पैदा नहीं हो पाता. और इन मरीजों को हमेशा इंसुलिन के इंजेक्शन लगाने की जरूरत होती है. इसका अब तक और कोई इलाज नहीं है. कितनी बार, कब और शरीर के किस हिस्से में हर दिन इंजेक्शन लेना है ये डाक्टर ही बताता है.


B. टाइप 2 डायबिटीज: डायबेटिक लोगों में से 90% डायबेटिक टाइप 2 के होते हैं जिनके शरीर में बहुत कम इंसुलिन बनती है या फिर शरीर उसका इस्तेमाल ढंग से नहीं कर पाता है.


डाक्टर और नर्स जैसे अनुभवी लोगों का सहारा होते हुये भी इंसान को हर दिन खुद ही अपनी बीमारी का सामना करना पड़ता है. इसलिये उसके बारे में क्या करना है उसे खुद समझदारी से काम लेना चाहिये. डायबिटीज का प्रबंधन यानि अनुशासन (Management) स्वयं करना सीखना चाहिये. सेहत के लिये व्यायाम करना, टहलना, तैरना अच्छा है. अपना वजन कम करना चाहिये व और कामों में भी सक्रिय रहना चाहिये. डायबेटिक के लिये मीठी व तली चीजों को खाने की बिलकुल मनाही नहीं होती है. बल्कि उन्हें बहुत कम खायें और भी खाने की अन्य चीजों में संतुलन रखें. घी का इस्तेमाल न करके ओलिव आयल या रिफाइंड आयल का उपयोग करें लेकिन बहुत कम. खाना सही समय पर खायें व ताजे फल और सब्जियों का अधिक प्रयोग करें.


नियमित रूप से डाक्टर को दिखाना, ब्लड सुगर लेवल, कोलेस्ट्रल लेवल, और आँखों की जाँच करवाना बहुत ही जरूरी होता है ताकि कोई समस्या बढ़ने के पहले उसका सही उपचार किया जा सके.